॥गुरु भक्ति महिमा॥

“शिव पार्वती संवाद”

●भगवान शंकर देवी पार्वती से कहते है “गुरुदेव के नाम से बड़ा कोई मंत्र नही” गुरु नाम ही मूल मंत्र है, मंत्रो राज है!

जिस तरह अग्नि में तपकर सोना शुद्ध होता है इस तरह गुरुदेव के नाम का निरंतर जप करने से शिष्य कि बुद्धि एवं मन शुद्ध होता है!

साधक अलग-अलग उपलब्धि के अलग-अलग मंत्र करता है जैसे..

– अन प्राप्ति के लिए अन्नपूर्णा मंत्र,
-धन टिकता नही तो कुबेर मंत्र,
-गाड़ी, मकान प्राप्ति मंत्र,
-लक्ष्मी प्राप्ति केलिए कनक धारा मंत्र,
-देवी-देवता को वश करने का मंत्र,
-सिद्धी प्राप्ति मंत्र,
-भूत-प्रेत निवारण मंत्र,
-आधी-व्याधि-उपाधि निवारण मंत्र
– मृत्युंजय मंत्र इत्यादि

●तो यहाँ भगवान शंकर कहते है एक गुरुदेव के नाम के मंत्र से साधक को सब कुछ सहजता से प्राप्त होता है!

नाम किसे कहते है??

निम्न कोटि के गुरु शिष्य को अक्षरी मंत्र देते हैं परंतु “सद्गुरु देवजी” शिष्य को ब्रह्म नाद अथवा जिसे मूल मंत्र भी कहते है, जिससे अंड-पिंड-ब्रम्हांड कि रचना हुए ऐसा मंत्र प्रदान करते है!

गुरुदेव के नाम का ध्यान करने से शिष्य कि सर्वप्रकार से रक्षण होता है!

ध्यान के दो प्रकार होते है!

१~आँखे बंद करके साधना में रहना!

२~सद्गुरु परमात्मा से प्रेम होने पर शिष्य के साँस-साँस में,नस-नस में गुरुदेव कि स्मृति रहती है वो प्रेम वश किया हुआ ध्यान ही है!

उदाहरण:- शबरी को युवानी में उनके गुरुदेव से वरदान दिया कि आपके घर राम आएंगे तो क्या शबरी ने कभी राम नाम कि माला कि, राम कि पूजा-अर्चना कि नही.. केवल श्रद्धा पूर्वक श्री राम कि प्रतिष्ठा की.. राम आंएगे! क्या उसमें कोई मंत्र, ध्यान था! नही.. केवल प्रेम, श्रद्धा और धीरज थी!

गुरुदेव के नाम स्मरण से शिष्य कि हर तरह से रक्षा होती है, जैसे सोच-विचार, ज्ञान, सिद्धी, मान-सम्मान, शत्रु यहाँ तक मृत्यु एवं सभी आपत्ति से भी!

“श्वासे श्वासे गुरु नाम स्मरात्मन्”

श्वास श्वास में गुरुदेव के नाम का स्मरण करने से शिष्य को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष भी प्राप्त होता है!

क्रमशः

॥श्री गुरुवे शरणम् ममः॥