1 .भस्त्रिका से पहले 1 गिलास कुनकुना नीबू पानी पिएँ फिर जाँचेँ कि दोनोँ नथुने ऊपर तक साफ और खुले होँ ।
2 . यदि नाक की हड्डी बढ़ी हो साइनस हो तो चिकित्सक की सलाह ले लेँ ।
3 . यदि हाई ब्लड प्रेशर , उत्तेजना , दमा , अल्सरेशन तथा नाक कान और गले के रोग से ग्रस्त होँ तो भस्त्रिका न करेँ ।
4 . गर्भवती स्त्रियाँ इस अभ्यास को न करेँ ।
5 . भस्त्रिका करते समय शरीर को झटके न लगने देँ । पूरक व रेचक श्वास मेँ संतुलन बनाए रखेँ ।
6 . भस्त्रिका प्राणायाम का समापन एक झटके मेँ न करेँ वल्कि अभ्यास की गति को मंदन देते हुए साँस को सामान्यता की ओर लाते हुए बिल्कुल आराम से करेँ ।
7 . भस्त्रिका समाप्त करने के ठीक बाद पाँच अभ्यास कपाल भाती के अथवा अनुलोम विलोम के अवश्य करेँ ताकि शरीर सामान्य स्थिति मेँ आ जाए ।
8 . भस्त्रिका का प्रारम्भ 24 पूरक रेचक क्रम से करेँ और क्रमशः बढ़ाते हुए 96 पूरक रेचक क्रम तक पहुँचा कर स्थिर कर देँ । परिपक्वता मेँ भस्त्रिका का यह क्रम 2 से 3 मिनट मिनट मेँ समाप्त होना चाहिए ।
9 . यदि चक्कर कमजोरी या जी मिचलाए तो अभ्यास रोक कर आराम से लेट जाएं ।